DUSU 2026: ABVP के पैनल की शानदार जीत

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव केवल चार पदों के लिए होने वाला चुनाव नहीं है। यह देश के सबसे चर्चित छात्र राजनीतिक मंचों में से एक है, जहां विश्वविद्यालय की विशाल छात्र आबादी के बीच संगठनात्मक क्षमता, उम्मीदवारों की व्यक्तिगत स्वीकार्यता, सामाजिक प्रतिनिधित्व और छात्र मुद्दों की समझ—सभी एक साथ परखी जाती हैं। 2026 का चुनाव 18 सितंबर को होना है और इस बार अध्यक्ष पद के लिए सात, उपाध्यक्ष के लिए पांच तथा सचिव और संयुक्त सचिव के लिए चार-चार उम्मीदवार मैदान में हैं।

ऐसे में ABVP का चार सदस्यीय पैनल विशेष चर्चा में है। अध्यक्ष पद पर यश डबास, उपाध्यक्ष पद पर इशू मौर्य, सचिव पद पर रिया छावड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्यराज सिंह को मैदान में उतारा गया है। पैनल की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि चारों उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पृष्ठभूमि एक जैसी नहीं है। खेल, छात्र राजनीति, ग्रामीण-कृषक पृष्ठभूमि और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खेल अनुभव का मिश्रण इसे विविध सामाजिक प्रतिनिधित्व वाला पैनल बनाता है।

पिछला चुनाव ABVP के पक्ष में महत्वपूर्ण आधार

ABVP के लिए सबसे बड़ा संस्थागत लाभ उसका हालिया चुनावी प्रदर्शन है। 2025 के DUSU चुनाव में ABVP ने चार में से तीन केंद्रीय पद जीते थे। अध्यक्ष पद पर आर्यन मान ने 28,841 मत प्राप्त किए, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 12,645 मत मिले। उपाध्यक्ष पद NSUI के खाते में गया, जबकि सचिव और संयुक्त सचिव पद ABVP ने जीते।

2025 में लगभग 2.75 लाख पात्र छात्रों में करीब 39 प्रतिशत मतदान हुआ था। यह आंकड़ा बताता है कि DUSU चुनाव में केवल संगठन की लोकप्रियता ही निर्णायक नहीं होती; मतदान प्रतिशत और अंतिम चरण में समर्थकों को मतदान केंद्र तक पहुंचाने की संगठनात्मक क्षमता भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए 2026 के चुनाव को समझने के लिए 2025 का परिणाम ABVP के लिए एक मजबूत शुरुआती आधार बनता दिख रहा है I

उम्मीदवारों की विविध पृष्ठभूमि

ABVP के इस पैनल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उम्मीदवारों की व्यक्तिगत प्रोफाइल बताई जा रही है।

अध्यक्ष पद के प्रत्याशी यश डबास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टेनिस खेल चुके हैं और श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से जुड़े रहे हैं। उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी इशू मौर्य सत्यवती कॉलेज से स्नातक हैं और छात्र राजनीति का अनुभव रखते हैं। सचिव पद की प्रत्याशी रिया छावड़ी किसान परिवार से आती हैं और इंटर-कॉलेज बास्केटबॉल खिलाड़ी रही हैं। संयुक्त सचिव पद के प्रत्याशी लक्ष्यराज सिंह अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल खिलाड़ी हैं और एशियाई खेलों से जुड़े खेल अनुभव रखते हैं।

यह संयोजन महत्वपूर्ण है क्योंकि DUSU की राजनीति केवल वैचारिक मुद्दों से निर्धारित नहीं होती। उम्मीदवार की कॉलेज पहुंच, व्यक्तिगत पहचान, खेल जगत से संपर्क, छात्र गतिविधियों में भागीदारी और अलग-अलग सामाजिक समूहों में स्वीकार्यता भी चुनावी प्रभाव पैदा करती है।

क्षेत्र और सामाजिक प्रतिनिधित्व का समीकरण

दिल्ली विश्वविद्यालय में देश के अलग-अलग हिस्सों से विद्यार्थी आते हैं। इसलिए किसी भी केंद्रीय छात्र संगठन के लिए केवल दिल्ली-केंद्रित सामाजिक समीकरण पर्याप्त नहीं है। ABVP के पैनल में किसान परिवार से आने वाली छात्रा उम्मीदवार रिया छावड़ी और खेल क्षेत्र से जुड़े उम्मीदवारों का होना ग्रामीण, छोटे शहरों और मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों के बीच प्रतिनिधित्व का संदेश स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

दूसरी ओर, 2026 का चुनाव केवल ABVP और NSUI की पारंपरिक प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं है। इस बार उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि में भी उल्लेखनीय विविधता दिखाई दे रही है। पहली बार लद्दाख से उम्मीदवार और दृष्टि बाधित छात्र जैसे प्रतिनिधित्व भी चुनावी मैदान में दिखाई दे रहे हैं। इससे एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है इस चुनाव में प्रतिनिधित्व स्वयं एक चुनावी मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।

खेल और युवा पहचान का प्रभाव

ABVP पैनल की एक विशिष्ट विशेषता उसका खेल-केंद्रित चरित्र भी है। अध्यक्ष पद के उम्मीदवार का अंतरराष्ट्रीय टेनिस अनुभव, सचिव पद की उम्मीदवार का बास्केटबॉल से जुड़ाव और संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवार का अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल अनुभव—इन तीनों को एक साथ देखें तो पैनल में खेल जगत की मजबूत उपस्थिति दिखाई देती है। दिल्ली विश्वविद्यालय के युवा मतदाताओं के लिए खेल केवल मनोरंजन नहीं बल्कि करियर, छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास से जुड़ा क्षेत्र है। इसलिए खेल पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों की मौजूदगी छात्र समुदाय के एक महत्वपूर्ण हिस्से को आकर्षित कर सकती है।

हालांकि, इसका वास्तविक चुनावी प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि ये व्यक्तिगत उपलब्धियां छात्र हितों के ठोस एजेंडे से किस प्रकार जुड़ती हैं

अभाविप की ऐतिहासिक जीत

वर्ष 2025 का मजबूत चुनावी प्रदर्शन, व्यापक संगठनात्मक अनुभव और 2026 के पैनल में व्यक्तिगत-सामाजिक विविधता अभाविप के पैनल में साफ दिखाई दी। इसी के चलते अभाविप ने इस बार अभूतपूर्व विजय हासिल की है। 

खेल पृष्ठभूमि, किसान परिवार से आने वाली महिला उम्मीदवार, अनुभवी छात्र कार्यकर्ता और विभिन्न कॉलेजों से जुड़ी पहचान ने ABVP को अलग-अलग छात्र समूहों तक पहुँच बनाने का अवसर दिया। इसके साथ ही, पिछले चुनाव में चार में से तीन केंद्रीय पद जीतना संगठन की मौजूदा चुनावी क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण रहा है।

अभाविप की संगठनात्मक क्षमता, प्रभावी उम्मीदवार, आक्रामक चुनाव प्रचार और समग्र मुद्दों के समाधान के संकल्प के साथ दिल्ली में छात्र नेतृत्व को एक खुला वातावरण देने की कोशिश सफल रही है। इसी पहचान ने उसे बाकी संगठनों से अलग साबित किया। परिसरों में निरंतर सक्रियता, छात्र हितों के साथ-साथ हर राष्ट्रीय मुद्दे पर अपनी बात रखने की रणनीति और सटीक चुनावी तैयारी का ही परिणाम है कि अभाविप को हर कॉलेज, कैंपस और छात्र बहुल कॉलोनियों में जबरदस्त समर्थन मिला। इसी प्रचंड जनसमर्थन के बल पर अभाविप के पूरे पैनल ने इस बार शानदार जीत दर्ज की है।

लेखक- (प्रमोद कुमार)

लेखक पांचजन्य में सहायक संपादक हैं

ae.bpdl@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *