परिचय
विजयादशमी, 27 सितंबर 1925 को नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के घर पर, उनकी पहल पर कुछ युवाओं के संकल्प लिया, इसी दिन पहली संघ की पहली शाखा लगाते समय तरुणों के कोमल में मन अपनी मात्रभूमि की रक्षा और व्यक्ति निर्माण के माध्यम से भारत को एकता के सूत्र में बांधने का प्रण किया I अपने जीवन को सदैव संघ कार्य में समर्पित करते हुए, युवा हुंकार भरी, सोचो वो भी उस समय के जेन-जी रहे होंगे, उनकी सोच आज सम्पूर्ण समाज का मार्गदर्शन कर रही है I राष्ट्रीय भावना से असंख्य लोगों के चरित्र को सींचने वाला एक संगठनामक वटवृक्ष खड़ा होकर युवाओं की सकारात्मक सोच का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत कर रही है I
देश के युवाओं का कैसे राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना जागते हुए, अपने चरित्र को राष्ट्रानुकुल बनाते हुए, अपने सर्वांगीण विकास के साथ-साथ राष्ट्र की आवश्यकता के अनुरूप अपने जीवन को समर्पित करने देने वाले युवाओं की चर्चा आज आवश्यक रूप से होनी चाहिए I ऐसी परिस्थिति में इसकी सार्थकता बहुत बढ़ जाती है, जब तथाकथित बुद्धिजीवी जंतर मंतर पर युवाओं के आन्दोलन को बढ़ा चढाकर महिमा मंडित किया जा रहा हो I सत्ता बदलने से लेकर चंद वामपंथी भोंपुओं सहित, सोशल मीडिया पर भटके हुए लोगों के आधार पर छदम विमर्श खड़ा करने का देश में निर्थक प्रयास हो रहा हो, ऐसे में उन युवाओं की चर्चा होना बहुत जरुरी है जिन्होंने 27 सितंबर 1925 को नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के घर पहली राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखा लगायी होगी I
संघ की स्थापना से युवाओं की दिशा
हम सभी जानते हैं, संघ की स्थापना विजयादशमी, 27 सितंबर 1925 को नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के घर पर हुई थी। उस समय कुछ चुनिंदा युवकों की उपस्थिति में संगठन प्रारंभ किया गया। इनमें डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी(संस्थापक) द्वारा आयोजित संघ की प्रथम शाखा में सर्वश्री भाऊजी कावरे, अण्णा सोहनी, विश्वनाथराव केलकर, बालाजी हुद्दार, बापूराव भेदी, मार्तंडराव जोग जैसे उर्जावान युवा सम्मिलित हुए थे, उसी दिन शाम को स्थापना सभा आयोजित की गयी, जिसमें 17 युवकों की सहभागिता रही I पहली नियमित दैनिक शाखा (नित्य शाखा) 28 मई 1926 को नागपुर के मोहितेवाड़ा मैदान में प्रारंभ हुई। एक बड़े उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, देश में बढ़ रही कुरीतियों और समाज में विघटन की अवस्था में सभी राष्ट्रीय एकता के सूत्र में बांधने, युवकों में राष्ट्रभक्ति की भावना से सिंचित करके उन्हें भारतीय अस्मिता को बचाए रखने के उद्देश्य से साथ चलने का युवाओं ने संकल्प लिया I
छद्म आन्दोलन का फर्जी विमर्श
किसी टिपण्णी को आधार बनाकर, युवाओं की भावनाओं को हथियार बनाकर, देश की व्यवस्था के खिलाफ खड़ा करना आन्दोलन नहीं कहा जा सकता I भक्ति आन्दोलन से लेकर, स्वाधीनता आन्दोलन तक हमने देखा कि एक रचनात्नक विरोध, त्याग की भावना के साथ सत्ता के विरोध में, गलत नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के तारीकों पर नजर डालें तो समझ आता है, कि सत्ताधारी भी उनके देश का नेतृत्व हैं वो भी उसी देश के वासिंदे हैं, इसमें स्वाधीनता आन्दोलन अपवाद हो सकता है क्योंकि वह विदेशी सत्ता थी I
आज देश में विरोध के तरीके और युवाओं के विरोध और उनकी भाषा की चर्चा चहुँ ओर हो रही है I किसी भी सभ्य समाज में जो बातें स्वीकार्य नहीं हैं, ऐसे भाषा और ऐसे तरीके का इस्तेमाल हुआ, देश ने देखा और विदेशी मीडिया ने उसे अपने हिसाब से व्याख्यायित करके प्रसारित भी किया, इससे देश छवि और हमारे उर्जावान युवाओं के प्रति धारणा भी गलती बनती दिख रही है I भारत युवाओं का देश है, यहाँ के युवा स्वामी विवेकानंद जी की प्रेरणा से अपने जीवन को आगे बढ़ाने की परिपाटी प्रचलन में है, न कि मैकाले और मुसोलोनी I इसलिए हमारे रोल मॉडल अमर शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चन्द्र शेखर आजाद, अस्फाकुल्ला, अब्दुल हमीद, सावरकर और वीर गोकुला हो सकते हैं , बुरहान वानी नहीं I
युवा मन देशभक्ति
शक्ति संतुलन का विषय है, निश्चित रूप समाज में युवा हमारी शक्ति होता है, लेकिन यह शक्ति सही दिशा में चले तो राष्ट्र प्रगति की ओर बढ़ता है और यदि यह राष्ट्र विरोधी भावना से प्रभावित हो गया तो उसे कुछ भी अच्छा होता हुआ दिखाई नहीं देगा, वही से उसकी दिशा गलत होती दिखाई देती है I संघ इस विषय की संवेदनशीलता को समझता था, इसलिए गैर राजनैतिक प्रभाव और सहायता के युवाओं में राष्ट्रीय भावना बीच रोपने के कार्य में समर्पित भाव से लग गया I
मुद्दा यहाँ सोच और दृष्टिकोण का है, जब सुनियोजित रूप से हमारे युवाओं में देश की व्यवस्था के खिलाफ जहर भरा जायेगा तो जंतर मंतर जैसे आन्दोलन होंगे और यदि युवाओं ने सकारात्मकता से सोचा तो डिजिटल इंडिया अभियान को आत्मसात कर लिया तो भारत को वैश्विक डिजिटल क्रांति के केंद्र में ला खड़ा किया। वर्ष 2014 से पहले डिजिटल सेवाएं और इंटरनेट बड़े शहरों तक सीमित थे, लेकिन मोदी सरकार ने इंटरनेट और टेक्नोलॉजी को गांव-गांव तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा। भारतनेट और यूपीआई जैसी पहलों ने युवाओं के लिए अवसरों के नए दरवाजे खोले। आज देश के सुदूर गांवों का युवा भी स्मार्टफोन के जरिए ऑनलाइन बिजनेस, कंटेंट क्रिएशन, डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स से जुड़ पा रहा है। यूट्यूब, इंस्टाग्राम या फ्रीलांसिंग के जरिए हमारे युवा ग्लोबल मार्केट से सीधे जुड़कर आर्थिक समृद्धी और स्वावलंबन की ओर बढ़ रहे हैं। UPI आधारित डिजिटल पेमेंट सिस्टम ने भारत को दुनिया में जो अलग पहचान दिलाई है, उसकी चर्चा आज पूरी दुनिया के आर्थिक मंचों पर हो रही है।
संघ ने दी युवाओं को दिशा
क्या कारण था कुछ तरुणों ने, युवा मन से संघ की पहली शाखा प्रारम्भ होती है, एक पवित्र उद्देश्य, युवाओं के समायोजन और व्यक्ति निर्माण के भाव से चला वो अभियान आज देश के हर छोटे बड़े शहर, कस्बे, जिला केन्द्रों से लेकर तालुका, और गांव-गांव तक पहुंच गया है संघ I देश के युवाओं में देश भक्ति, राष्ट्रीय स्वाभिमान और अपनी मातृभूमि से प्रेम का पाठ पढ़ाने का क्रमबद्ध अभियान निरंतर चल रहा है I
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पूरे भारत में वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 90,000 हजार से अधिक शाखाएं, साप्ताहिक मिलन व संघ मंडली सहित संचालित हो रही हैं। संघ का संगठनात्मक ढांचा पिरामिड के आकार में सबसे छोटी इकाई ‘शाखा’ से शुरू होकर सर्वोच्च स्तर ‘अखिल भारतीय स्तर’ तक एक वटवृक्ष के रूप में कार्यरत है। राष्ट्रभक्त नागरिकों का निरंतर निर्माण करता हुआ संघ समाज को स्पष्ट दिखाई दे रहा है I
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