असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 82 सीटें जीतकर हैट्रिक लगाई है. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई में बीजेपी ने 126 सीटों वाले असम विधानसभा में 82 सीटें जीती है. वहीं असम की सत्ता पर वापसी की उम्मीद लगाए बैठी कांग्रेस के केवल 19 विधायक जीत पाए हैं. कांग्रेस के 19 विधायकों में 18 मुसलमान और केवल एक हिंदू है. ऐसे में बीजेपी को बैठे बिठाए कांग्रेस के खिलाफ मुस्लिम तुष्टीकरण का नैरेटिव सेट करने का मौका मिल गया है.
असम विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अकेले दम पर बहुमत हासिल हुआ है. इसके साथ ही बीजेपी ने असम में जीत की हैट्रिक लगाई है. 126 सीटों वाले असम विधानसभा में बहुमत के लिए 63 विधायकों की जरूरत होती है. बीजेपी के 82 विधायक जीते हैं. वहीं दूसरे नंबर पर रही कांग्रेस के 19 विधायक जीते हैं. बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BOPF) और असम गण परिषद (AGP) के 10-10 विधायक जीते हैं. इसके अलावा AIUDF और RJRD को 2-2 सीटें और टीएमसी के खाते में एक सीट आई है.
असम में कांग्रेस के 19 में से 18 मुस्लिम विधायक
परबतझोरा से मोहम्मद अशरफुल इस्लाम शेख, धुबरी से बेबी बेगम, जलेश्वर से आफताब उद्दीन मुल्ला, गोलपाड़ा पूर्व से अबुल कलाम रशीद आलम, सृजनग्राम से मोहम्मद नुरुल इस्लाम, चेंगा से अब्दुर रहीम अहमद, पकाबेतबारी से जाकिर हुसैन सिकदर, चमारिया से रेकिबुद्दीन अहमद, लहरीघाट से डॉ. आसिफ मोहम्मद नजर, रूपाहीहाट से नुरुल हुदा, समागुरी से तनज़ील हुसैन, सोनाई से अमीनुल हक लस्कर, अल्गापुर-कतलीचेरा से जुबैर अनम मजूमदार, करीमगंज उत्तर से जकारिया अहमद, गौरीपुर से अब्दुस सोबहान अली सरकार, बिरसिंग जरुआ से वाज़ेद अली चौधरी, मनकाचर से मोहिबुर रोहमन (बप्पी), करीमगंज दक्षिण से अमीनूर रशीद चौधरी I
केवल एक हिंदू
असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 19 विधायक जीते हैं, जिसमें से 18 मुस्लिम और केवल एक हिंदू हैं. केवल नोबाइचा विधानसभा सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी डॉ. जॉय प्रकाश दास ने जीत दर्ज की है. उन्हें 86981 वोट मिले. 16 राउंग गिनती के बाद उन्होंने 23751 वोटों से जीत दर्ज की है. कांग्रेस के विधायकों की लिस्ट देखकर पहली नजर में ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो यह असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM की सूची है. मौजूदा वक्त में असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी की ऐसी इकलौती है जो पूरे देश में खुलकर मुस्लिम हितों की बात करती है और उसी को केंद्र में रखकर राजनीति करती है.
असम और बंगाल में खूब चला हिंदू ध्रुवीकरण कार्ड
कांग्रेस के विजेता 19 विधायकों की लिस्ट में 18 मुस्लिम और केवल एक हिंदू का होने मतलब साफ है कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का हिंदू ध्रुवीकरण कार्ड चल गया है. कांग्रेस से निकलने के बाद बीजेपी में आए हिमंता ऐसे नेता हैं जिनकी राजनीति 360 डिग्री घुमी है. बीजेपी में आने के बाद हिमंता मुस्लिमों को लेकर बेहद सख्त लहजे में अपनी बात कहते हैं. असम चुनाव के पूरे प्रचार पर नजर डालें तो सीएम हिंमता अपनी तमाम रैलियों कहते हुए पाए गए थे कि असम की सनातनी जनता उन्हें वोट करेगी. यहां तक की उनका एक चुनावी विज्ञापन भी खासा चर्चा में रहा था जिसमें वह बंदूक से टोपी पहने हुए शख्स को गोली मारते हुए दिखाए गए थे. हालांकि चुनाव आयोग की दखल के बाद इस विज्ञापन पर रोक लगा दी गई थी.
तृणमूल के 80 उम्मीदवारों में से 31 मुस्लिम
हामिदुल रहमान, मो. गुलाम रब्बानी, आजाद मिनहाजुल आरफिन, मसरूफ हसन, तोराफ हुसैन मंडल,एमडी मुतिबुर, अब्दुर रहीम बोक्सी, इस्लाम एमडी नजरुल, शबीन याश्मीन, मौहम्मद नूर आलम, अख्रुज्ज़मान, अब्दुल अजीज डॉक्टर, रियात हुसैन सरकार, मुस्तफिजुर रहमान, नियामत शेख, बाबर अली, रुकबानुर रहमान, अलीफा अहमद, जुबेर शेख, बुरहानुल मुकाद्दिम (लिटन), मोहम्मद काशिम सिद्धकी, अनीसुर रहमान बिदेस , अब्दुल मातीन मुहाम्मद, मह: तौसीफुर रहमान, मोहममद बहरुल इस्लाम, मोहम्मद शमीम अहमद मुल्ला, अहमद जावेद खान, अब्दुल खालिख मुल्ला, फिरहद हकीम, फायेज़ुल हक (काजल शेख), एवं मुराराइ से डॉ मुसर्रफ हुसैन
एक हुआ हिन्दू
हिन्दू भावना जगाने में इन विधानसभा चुनावों को सदैव उदहारण के रूप में याद किया जाता रहेगा I परमपरागत रूप से यही माना जाता था, कि केवल मुस्लिम ही एकमुश्त वोट करता है, यह अवधारणा भी बलवती थी कि हिन्दू कभी एक नहीं हो सकता है I लोग कहा करते थे हिन्दू के नाम पर कभी कोई चुनाव नहीं जीता जा सकता I देश में हुए पांच राज्यों के चुनावों में विशेष रूप से असम और बंगाल के परिणाम यह स्पष्ट करते हो चला है, हिन्दू भावना लोगों में जगी और चुनाव को निर्णायक मोड़ पर पहुँचाया I
असम में भाजपा के मुख्यमंत्री हेमंत विश्व शरमा तो स्पष्ट रूप से हिन्दुओं की एकता,उनके स्वाभिमान और मुस्लिमों को औकात में रहने की बात कहते सबने सुना, वही बंगाल में भाजपा के प्रमुख चेहरे शुभेंदु अधिकारी द्वारा भी यह कहा जाना कि मुझे हिन्दू वोट चाहियें, उन्होंने हिन्दू-हिन्दू भाई भाई के नारे खुले आम दिए, नंदीग्राम जीत को उन्होंने “हिंदुत्व की जीत” बताया I वही दूसरी ओर विपक्षी पार्टियों द्वारा मुस्लिमों पर भरोसा जताया जा रहा था, मुस्लिम लोगों की बात करना, उन्हें उम्मीदवारी में प्रमुखता देना, मुस्लिम ध्रुवीकरण पर काम करना कांग्रेस और तृणमूल की प्राथमिकता रही I
रोहिंग्या और बंग्लादेशी अवैध घुसपैठियों को प्रश्रय
तृणमूल और कांग्रेस सहित अन्य क्षेत्रीय राजनैतिक दलों द्वारा रोहिंग्या और बंग्लादेशी अवैध घुसपैठियों को प्रश्रय दिए जाने बहुत ही निकटता से देश रहे थे हिन्दू, इस बार वह भी जगे और देश में पहली बार मुस्लिमो की हिमायत करने वाले तृणमूल और कांग्रेस सहित अन्य क्षेत्रीय राजनैतिक दलों हराने के लिए एकजुट होकर वोट किया, परिणाम हम सबके सामने है, आंकड़े भी यही कह रहे हैं और चुनावों के दौरान सभी दलों के अपने-अपने व्यवहार भी स्पष्ट दिखाई दिए I
लेखक: प्रमोद कुमार
प्रकाशित: 9 may 2026
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