प्रमोद कुमार
सुविधा की दौड़ में आजीविका और सुरक्षा से खिलवाड़
भारत में परिवहन व्यवस्था तेजी से बदल रही है। मोबाइल ऐप आधारित सेवाओं, ऑनलाइन बुकिंग और कम लागत में यात्रा करने की बढ़ती मांग ने लोगों को आवागमन के नए विकल्प दिए हैं। यह परिवर्तन सुविधाजनक अवश्य है, लेकिन इसके साथ एक गंभीर समस्या भी उभर रही है—निजी मोटरसाइकिलों, कारों तथा अन्य निजी वाहनों का व्यावसायिक उपयोग। अनेक स्थानों पर निजी नंबर प्लेट वाले वाहनों से यात्रियों को किराये पर लाने-ले जाने का काम किया जा रहा है, जबकि पारंपरिक ऑटो, टैक्सी और अन्य पंजीकृत व्यावसायिक वाहन चालक परमिट, बीमा, कर तथा अन्य नियामकीय दायित्वों का पालन करते हुए अपना व्यवसाय चलाते हैं।
यहाँ प्रश्न केवल प्रतिस्पर्धा का प्रश्न नहीं है। इससे लाखों परिवारों की आजीविका, परिवहन क्षेत्र में समान अवसर, यात्रियों की सुरक्षा और सरकारी नियमन की प्रभावशीलता जैसे महत्वपूर्ण विषय जुड़े हैं। प्रश्न यह भी है कि जब एक ही सड़क पर समान प्रकार की सेवा देने वाले लोगों के लिए नियम अलग-अलग हों, तो निष्पक्ष व्यवस्था कैसे कायम रह सकती है? अतः नीतिगत अस्पष्टता, ऑटो-टैक्सी चालकों की आजीविका पर संकट और सड़क सुरक्षा का गंभीर प्रश्न खड़ा होता दिख रहा है I
निजी वाहन बनाम व्यावसायिक वाहन
नियमों का अंतर क्यों महत्वपूर्ण है?निजी वाहन मुख्यतः व्यक्तिगत आवागमन के लिए पंजीकृत होते हैं, जबकि परिवहन व्यवसाय में प्रयुक्त वाहनों पर लागू नियम उनके उपयोग, वाहन की श्रेणी और संबंधित राज्य के कानूनों के अनुसार निर्धारित होते हैं। व्यावसायिक परिवहन में परमिट, उपयुक्त बीमा, वाहन की फिटनेस, चालक के आवश्यक दस्तावेज और अन्य शर्तें लागू हो सकती हैं।
इसके बावजूद, जब कोई व्यक्ति निजी मोटरसाइकिल या कार से नियमित रूप से किराये पर यात्रियों को ढोता है, तो यह प्रश्न उठता है कि क्या वह लागू कानूनी शर्तों का पालन कर रहा है। हर निजी वाहन का व्यावसायिक उपयोग स्वतः अवैध नहीं कहा जा सकता, क्योंकि कुछ सेवाओं और वाहन श्रेणियों के लिए विशेष प्रावधान भी हो सकते हैं। किंतु जहां कानून व्यावसायिक परमिट, उचित पंजीकरण या बीमा की मांग करता है, वहां इन शर्तों को दरकिनार करके सेवा देना गंभीर नियामकीय समस्या है। समस्या का मूल किसी नई तकनीक या वाहन के प्रकार में नहीं, बल्कि समान सेवा के लिए लागू नियमों के पालन और प्रभावी निगरानी में है।
ऑटो-टैक्सी चालकों पर मार
ऑटो और टैक्सी चलाने वाले अधिकांश लोग बड़े कारोबारी नहीं, बल्कि मेहनत करके परिवार का भरण-पोषण करने वाले छोटे स्वरोजगारकर्ता हैं। कई चालक वाहन खरीदने के लिए ऋण लेते हैं, प्रतिदिन ईंधन पर खर्च करते हैं, मरम्मत कराते हैं, बीमा और अन्य शुल्क चुकाते हैं तथा अपने परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी करते हैं।
जब इन्हीं मार्गों पर निजी वाहनों के माध्यम से कम लागत पर यात्रियों को ले जाने की सेवाएं उपलब्ध होती हैं, तो पारंपरिक चालकों के सामने प्रतिस्पर्धा की कठिन परिस्थिति पैदा हो सकती है। यदि एक चालक नियमानुसार सभी खर्च वहन करता है और दूसरा उन्हीं दायित्वों से बचकर सेवा देता है, तो दोनों के बीच समान प्रतिस्पर्धा नहीं रह जाती। इसका परिणाम यात्रियों की संख्या और प्रतिदिन की कमाई में गिरावट, किराये को लेकर दबाव, ऋण चुकाने में कठिनाई और परिवारों की आर्थिक असुरक्षा के रूप में सामने आ रहे हैं।
नीति अस्पष्ट-दिशाहीन असंगठित क्षेत्र
इस समस्या का एक प्रमुख पहलू नियमों की जानकारी, व्याख्या और क्रियान्वयन में दिखाई देने वाली असमानता है। केंद्र सरकार मोटर वाहन कानूनों के माध्यम से व्यापक नियामकीय ढांचा उपलब्ध कराती है, जबकि परमिट, पंजीकरण, प्रवर्तन और स्थानीय परिवहन संचालन में राज्यों तथा संबंधित प्राधिकरणों की भी महत्वपूर्ण भूमिका कही जा सकती है।
हमारे निजी वाहनों से संचालित यात्री सेवाओं, ऐप आधारित बाइक टैक्सी, साझा परिवहन और व्यावसायिक कार सेवाओं के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश, पारदर्शी अनुमति प्रक्रिया और प्रभावी निगरानी उपलब्ध न हो, तो भ्रम की स्थिति पैदा होती है। कहीं कोई सेवा अनुमति के साथ चलती है, कहीं उस पर प्रतिबंध या सीमाएं लागू होती हैं और कहीं नियमों के पालन को लेकर शिकायतें सामने आती हैं।
इस अस्पष्टता का नुकसान केवल पारंपरिक चालकों को नहीं होता। इससे यात्रियों, सेवा प्रदाताओं, वाहन मालिकों और प्रशासन के बीच भी अनिश्चितता बढ़ती है। एक व्यवस्थित परिवहन बाजार के लिए आवश्यक है कि नियम स्पष्ट हों, उनका पालन सभी संबंधित पक्षों से कराया जाए और उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई निष्पक्ष तथा पारदर्शी हो।
असुरक्षित सफ़र और यात्री
निजी वाहनों के व्यावसायिक उपयोग पर चर्चा करते समय सड़क सुरक्षा को केंद्र में रखना आवश्यक है। दोपहिया वाहनों पर यात्रियों को बैठाकर किराये पर यात्रा कराना, तेज गति से बुकिंग पूरी करने का दबाव, हेलमेट और सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी, वाहन की स्थिति तथा चालक के प्रशिक्षण जैसे विषय महत्वपूर्ण विषय जरुरी हैं। हालांकि यह कहना उचित नहीं होगा कि निजी वाहन से दी जाने वाली प्रत्येक सेवा दुर्घटना का कारण बनती है या हर व्यावसायिक वाहन पूरी तरह सुरक्षित है। दुर्घटनाओं के कारण अनेक हो सकते हैं। फिर भी, यदि किसी सेवा के संचालन में आवश्यक सुरक्षा मानकों, बीमा शर्तों, चालक की पात्रता या यातायात नियमों की अनदेखी होती है, तो यात्रियों और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं का जोखिम बढ़ता दिख रहा है।
दुर्घटना के बाद मुआवजे और जिम्मेदारी का प्रश्न भी महत्वपूर्ण है। यदि वाहन का वास्तविक उपयोग उसके बीमा की शर्तों से मेल नहीं खाता, तो दुर्घटना की स्थिति में बीमा दावे पर विवाद उत्पन्न हो सकता है। इसलिए यात्रियों को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि वे किस प्रकार के वाहन में यात्रा कर रहे हैं, सेवा किसके माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है और दुर्घटना की स्थिति में शिकायत कहां दर्ज कराई जा सकती है।
सस्ती सेवा बनाम निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा
निजी वाहन आधारित सेवाओं का एक प्रमुख आकर्षण कम किराया और शीघ्र उपलब्धता है। विशेषकर महानगरों में अंतिम दूरी तक पहुंचने, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में आवागमन और कम दूरी की यात्रा के लिए बाइक टैक्सी जैसी सेवाएं उपयोगी साबित हो सकती हैं। सस्ती सेवा का अर्थ यह नहीं होना चाहिए कि उसकी वास्तविक लागत का बोझ किसी दूसरे वर्ग पर डाल दिया जाए। यदि एक सेवा प्रदाता सुरक्षा, बीमा और अन्य अनिवार्य दायित्वों का पालन करता है, जबकि दूसरा उनका उल्लंघन करके कम किराया देता है, तो यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा नहीं है।
केवल पारंपरिक परिवहन व्यवसाय की रक्षा के नाम पर उपयोगी नई सेवाओं को पूरी तरह समाप्त कर देना भी उचित समाधान नहीं होगा। सरकार का उद्देश्य किसी एक वर्ग को अनुचित लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना होना चाहिए जिसमें नवाचार, यात्रियों की सुविधा, चालक की आजीविका और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन कायम करना होगा ।
स्पष्ट नीति एवं नियामकों में सुधार
इस समस्या का स्थायी समाधान केवल चालान काटने या कभी-कभार अभियान चलाने से नहीं निकलेगा। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों को परिवहन क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों का आकलन करते हुए स्पष्ट, व्यावहारिक और पारदर्शी नीति विकसित करनी होगी।
निजी वाहनों के व्यावसायिक उपयोग की परिभाषा, अनुमति की शर्तें और प्रतिबंधों को आम नागरिकों तथा वाहन चालकों के लिए स्पष्ट बनानी होंगी, जहां बाइक टैक्सी या अन्य निजी वाहन आधारित सेवाओं की अनुमति दी जाए,वाहन श्रेणी, पंजीकरण, बीमा, चालक की पात्रता, यात्री सुरक्षा और जवाबदेही की शर्तें निर्धारित करनी होंगी।
ऐप आधारित कंपनियों और अन्य सेवा संचालकों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। केवल वाहन चालक पर कार्रवाई करके सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनी को पूरी तरह जिम्मेदारी से मुक्त नहीं रखा जाना चाहिए। लागू कानून के अनुसार कंपनियों को वाहन तथा चालक के आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन, शिकायत निवारण और सुरक्षा संबंधी मानकों का पालन पर सख्ती करनी होगी ।
शिकायतों की सुनवाई और जवाबदेह कौन
परिवहन क्षेत्र के छोटे व्यवसायियों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना भी उतना ही आवश्यक है जितना नियम बनाना। यदि किसी क्षेत्र में निजी वाहनों द्वारा कथित रूप से अवैध व्यावसायिक संचालन किया जा रहा है, तो संबंधित परिवहन विभाग को शिकायत दर्ज करने, उसकी जांच करने और कार्रवाई की स्थिति बताने के लिए एक सुलभ व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए।
शिकायतों के लिए ऑनलाइन पोर्टल, हेल्पलाइन और समयबद्ध निस्तारण प्रणाली विकसित की जा सकती है। साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वे व्यक्तिगत चालक हों या बड़े व्यावसायिक सेवा प्रदाता।
ऑटो और टैक्सी चालकों की यूनियनों को भी चाहिए कि वे तथ्यों, वास्तविक नुकसान के आंकड़ों और ठोस सुझावों के साथ सरकार के समक्ष अपनी बात रखें। शांतिपूर्ण, संगठित और प्रमाण-आधारित प्रयास समस्या को अधिक प्रभावी ढंग से सामने ला सकते हैं।
निजी वाहनों का व्यावसायिक उपयोग आज केवल परिवहन के साधनों में बदलाव का विषय नहीं रह गया है। यह स्वरोजगार, आर्थिक न्याय, उपभोक्ता सुविधा, सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा प्रश्न बन चुका है। ऑटो और टैक्सी चालक यदि नियमों का पालन करते हुए अपना जीवनयापन कर रहे हैं, तो उन्हें ऐसी प्रतिस्पर्धा के सामने असहाय नहीं छोड़ा जा सकता जिसमें कुछ लोग कथित रूप से अनिवार्य नियमों का पालन किए बिना समान व्यवसाय करते हों।
इसी प्रकार, नई परिवहन सेवाओं को केवल विरोध के आधार पर खारिज करना भी उचित नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार स्पष्ट नीति बनाए, कानूनी दायित्वों को लागू करे और प्रत्येक वर्ग की शिकायतों को सुने।
सड़क किसी एक वर्ग की नहीं है, लेकिन उस पर चलने वाले प्रत्येक व्यावसायिक सेवा प्रदाता की जिम्मेदारी अवश्य है। सरकार का दायित्व है कि वह न तो तकनीकी नवाचार को अनावश्यक रूप से रोके और न ही छोटे परिवहन व्यवसायियों की आजीविका तथा यात्रियों की सुरक्षा की अनदेखी होने दे। जब नियम स्पष्ट होंगे, कार्रवाई निष्पक्ष होगी और शिकायतों की सुनवाई सुनिश्चित होगी, तभी परिवहन व्यवस्था वास्तव में सुव्यवस्थित, सुरक्षित और न्यायपूर्ण बन सकेगी।
आश्चर्य की बात तो यह है कि ‘बाइक टैक्सी’ शब्द मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में परिभाषित ही नहीं है। इसलिए सरकार द्वारा बाइक टैक्सी की अलग दुर्घटना-श्रेणी के बजाय सभी दोपहिया वाहनों के दुर्घटना आंकड़े बताये जा रहे हैं I
पिछले तीन वर्षों में दोपहिया वाहन दुर्घटनाएं और मौतें
| वर्ष | दर्ज दुर्घटनाएं | दुर्घटनाओं में मृतक |
| 2023 | 34,599 | 17,924 |
| 2024 | 41,357 | 20,414 |
| 2025 | 42,? | 20,600 |
| कुल (2023–2025) | वर्षवार दुर्घटना संख्या का योग यहां सावधानी से सत्यापित करना होगा | 58,938 |
उपरोक्त आंकड़े सभी दोपहिया वाहनों के हैं, केवल बाइक टैक्सी के नहीं।
स्रोत: राज्यसभा, अतारांकित प्रश्न संख्या 2980
लेखक
(प्रमोद कुमार)
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