केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने अनन्या एवं निखिल की पुस्तक ‘लिविंग द विवेकानंद वे’ का लोकार्पण किया
नई दिल्ली, सितम्बर
दिल्ली विश्वविद्यालय के शंकरलाल सभागार (नॉर्थ कैम्पस) में आयोजित विशेष समारोह में केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने गुरुवार को ‘लिविंग द विवेकानंद वे – प्रैक्टिकल स्पिरिचुअलिटी फॉर मॉडर्न इंडिया’ पुस्तक का लोकार्पण किया। यह पुस्तक विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी से जुड़े युवा लेखक डॉ. अनन्या अवस्थी और डॉ. निखिल यादव द्वारा सह-लेखित है।

लेखकों ने अपने वक्तव्य में स्वामी विवेकानंद के प्रमुख शिक्षाओं और उनके कर्मयोगी आह्वान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह कृति स्वामीजी के शाश्वत विचारों को आज की युवा पीढ़ी के लिए सरल और प्रासंगिक रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास है।
श्री प्रधान ने पुस्तक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि – “यह पुस्तक हमारे जनरेशन-ज़ेड के लिए प्रेरणा का स्रोत है। स्वामी विवेकानंद द्वारा प्रतिपादित अद्वैत, विश्व-बंधुत्व और निर्भीकता के सिद्धांत आज भी उतने ही आवश्यक हैं, जितने एक शताब्दी पूर्व थे।” उन्होंने इसे वेद और उपनिषदों की व्यावहारिक प्रस्तुति बताते हुए युवाओं के लिए जीवन-दिशा का मार्गदर्शक कहा।
इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने भी मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के स्वामी विवेकानंद पर विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि भारत का भविष्य एक आत्मविश्वासी और मूल्य-निष्ठ युवा पीढ़ी के हाथों में सुरक्षित है।

रूपा पब्लिकेशन्स के प्रबंध निदेशक श्री कपिश मेहरा भी मंच पर उपस्थित रहे।
श्री प्रधान ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस पुस्तक को “एक प्रशंसनीय पहल” बताते हुए कहा कि यह आधुनिक चुनौतियों का सामना कर रहे भारतीय युवाओं के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शक सिद्ध होगी। उन्होंने युवाओं को “भारत की लोकतांत्रिक चेतना के सबसे बड़े संरक्षक और एकीकरण की शक्ति” बताया।
इस अवसर पर अनेक गणमान्य अतिथियों, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों की उपस्थिति ने यह प्रमाणित किया कि आधुनिक शिक्षा और राष्ट्र-निर्माण में अध्यात्म की प्रासंगिकता निरंतर बनी हुई है। कार्यक्रम ने इस तथ्य को भी रेखांकित किया कि 21वीं सदी में भारत के युवाओं के लिए स्वामी विवेकानंद का संदेश अभी भी मार्गदर्शक प्रकाशस्तंभ है।


