KPR News Live

सोशल मीडिया और फेक न्यूज़: सच पहचानना क्यों हो रहा मुश्किल?

सोशल मीडिया और फेक न्यूज़: सच पहचानना क्यों हो रहा मुश्किल?

सोशल मीडिया और फेक न्यूज़: सच पहचानना क्यों हो रहा मुश्किल? आज का दौर डिजिटल क्रांति का दौर है। खबरें अब अख़बार के अगले दिन आने का इंतज़ार नहीं करतीं, बल्कि एक क्लिक में हमारे मोबाइल स्क्रीन पर आ जाती हैं। सोशल मीडिया—जैसे फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हाट्सऐप—सूचना का सबसे बड़ा माध्यम बन…

Read More
बूढ़ा-बिया का उत्साह

बूढ़ा-बिया का उत्साह

5 फरवरी/रोचक-प्रसंग बूढ़ा-बिया का उत्साह 1947 में अंग्रेजों के जाने के बाद भी उनकी छोड़ी गयी कई समस्याएं बनी रहीं। पूर्वोत्तर भारत भी ऐसी ही एक समस्या से जूझ रहा था। अंग्रेजों ने ठंडा मौसम और उपजाऊ खाली धरती देखकर वहां चाय के बाग लगाये। ये बाग मीलों दूर तक फैले होते थे। उनमें काम…

Read More
बलूचिस्तान में दशकों का सबसे बड़ा हमला: BLA का ‘हेरोफ-2’ ऑपरेशन, चीन-अमेरिका के लिए बड़ा अलर्ट

बलूचिस्तान में दशकों का सबसे बड़ा हमला: BLA का ‘हेरोफ-2’ ऑपरेशन, चीन-अमेरिका के लिए बड़ा अलर्ट

पाकिस्तान में शनिवार को बलूचिस्तान के 12 शहरों में एक साथ हमला किया गया। ये दशकों में हुआ सबसे बड़ा समन्वित हमला था। इस दौरान बलूचिस्तान के सबसे प्रमुख सैन्य ठिकाने, नागरिक स्थान, पुलिस चौकी और अर्धसैनिक बलों के ठिकानों पर जोरदार हमला किया गया। इस हमले में आत्मघाती हमलावरों के साथ साथ महिला लड़ाके…

Read More
बालिकाओं के लिए असुरक्षित दिल्ली

बालिकाओं के लिए असुरक्षित दिल्ली ?

संवादाता : वर्ष का प्रारंभिक माह में राष्ट्रीय राजधानी में लापता होने के आंकड़े सामने आ रहे हैं । विशेषकर, महिला और किशोरियों के लापता होने के मामले मन में भय पैदा कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस इन मामलों में जो भी कार्रवाई कर रही है, वह कुछ हद तक राहत तो देते हैं लेकिन…

Read More
AI से नौकरियां खत्म होंगी या नई संभावनाएं पैदा होंगी?

AI से नौकरियां खत्म होंगी या नई संभावनाएं पैदा होंगी?

AI से नौकरियां खत्म होंगी या नई संभावनाएं पैदा होंगी? — सच्चाई क्या है आज के समय में अगर किसी एक शब्द ने पूरी दुनिया को एक साथ डरा भी रखा है और आकर्षित भी, तो वह है — Artificial Intelligence (AI)। कहीं AI से बने न्यूज एंकर दिख रहे हैं, तो कहीं चैटबॉट इंसानों…

Read More
hindi Diwas

हिंदी की वैश्विक स्वीकार्यता के बावजूद देश में उपेक्षा क्यों?

– ललित गर्ग – हिंदी दिवस केवल एक औपचारिक आयोजनात्मक अवसर नहीं, बल्कि हमारी भाषाई अस्मिता राष्ट्रीयता और सांस्कृतिक आत्मगौरव का प्रयोजनात्मक प्रतीक है। विश्व की सर्वाधिक बोली जाने वाली तीसरी भाषा के रूप में हिंदी विश्व की उन चुनिंदा भाषाओं में से एक है जिसे करोड़ों लोग अपनी मातृभाषा, संपर्क भाषा और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति…

Read More
हृदय रोग

भारतीय दिल खतरे में, एक गंभीर चुनौती की टंकार

  – ललित गर्ग – आधुनिक युग को यदि सुविधाओं और संसाधनों का युग कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी, लेकिन इन सुविधाओं और विलासिताओं की कीमत भी समाज को चुकानी पड़ रही है। मशीनों और तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, परंतु इसके साथ ही ऐसी अनेक जीवनशैली-जनित बीमारियों को जन्म दिया…

Read More
हिंसा और अराजकता

अनिश्चित भविष्य एवं आभासी दुनिया से दुःखी युवापीढ़ी

– ललित गर्ग – पूरी दुनिया की सरकारें युवा के मुद्दों, उनमें बढ़ रहे तनाव एवं दुःखों और उनकी बातों पर ध्यान आकर्षित करे। न केवल सरकारें बल्कि आम-जनजीवन में भी युवकोें की स्थिति, उनके सपने, उनके जीवन लक्ष्य आदि पर चर्चाएं हो, अन्यथा युवकों की जीवनशैली में रचनात्मक परिवर्तन के स्थान पर हिंसा-आतंक-विध्वंस की…

Read More
बदलाव एवं विकास की राह ताकता बिहार चुनाव

बदलाव एवं विकास की राह ताकता बिहार चुनाव

– ललित गर्ग – बिहार में चुनावी रणभेरी बज चुकी है। मतदान की तिथियों की घोषणा के साथ ही लोकतंत्र का यह महायज्ञ आरंभ हो चुका है, जिसमें करोड़ों मतदाता दो चरणों में दिनंाक 6 और 11 नवंबर को अपने मत के माध्यम से राज्य की दिशा और दशा दोनों तय करेंगे। इस बार का…

Read More
विश्व शिक्षक दिवस

विश्व शिक्षक दिवस- 5 अक्टूबर, 2025 शिक्षा युद्ध मानसिकता को बदलने का सशक्त माध्यम बने

विश्व शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में मनाया जाता है। इस दिन आध्यापकों को सामान्य रूप से और कतिपय कार्यरत एवं सेवानिवृत्त शिक्षकों को उनके विशेष योगदान के लिये सम्मानित किया जाता है। इसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा साल 1966 में यूनेस्को और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की उस संयुक्त बैठक को याद…

Read More