चक्रवात ‘अरनब’
प्रकृति की गोद में जब समुद्र का मिज़ाज बदलता है, तो इसके परिणाम अत्यंत विनाशकारी हो सकते हैं। हाल में भारत के पूर्वी तटीय इलाकों में बंगाल की खाड़ी से उठने वाले एक नए मौसमी तंत्र को लेकर भारी हलचल और भय देखा जा रहा है। इस चक्रवाती तूफान का नाम ‘अरनब’ रखा गया है। समाचार चैनलों से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक, हर तरफ चक्रवात अरनब को लेकर तरह-तरह की खबरें देखने को मिल रही हैं। लोग इसके संभावित खतरे, इसके अनोखे नाम और इसके बनने के वैज्ञानिक चरणों को लेकर कई सवाल पूछ रहे हैं। इस विस्तृत ब्लॉग में, हम चक्रवात अरनब से जुड़े सभी मुख्य पहलुओं की समीक्षा करेंगे।
‘अरनब’ नाम का अनोखा राज़ और नामकरण प्रक्रिया
जब भी किसी बड़े तूफान का नाम सामने आता है, तो आम जनता के मन में पहला सवाल यही उठता है कि यह नाम किसने रखा और इसका अर्थ क्या है? चक्रवात ‘अरनब’ के संदर्भ में भी यही स्थिति देखने को मिली। कई लोगों के मन में उत्सुकता थी कि क्या यह नाम किसी प्रसिद्ध व्यक्ति या पत्रकार के नाम पर है?
लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग और वैज्ञानिक है। दरअसल, ‘अरनब’ नाम बांग्लादेश द्वारा दिया गया है। बंगाली भाषा में ‘अरनब’ शब्द का अर्थ ‘समुद्र’ होता है। इस नाम का किसी व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और ESCAP पैनल के नियमों के अनुसार, उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र के 13 देश मिलकर तूफानों के नामों की एक साझा सूची तैयार करते हैं। इन 13 देशों में भारत, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका, थाईलैंड, ईरान, कतर, सऊदी अरब, UAE और यमन शामिल हैं। जब भी बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में चक्रवात बनता है, तो इस साझा सूची में से क्रमानुसार नाम चुनकर तूफान को आवंटित किया जाता है। इस बार बांग्लादेश की बारी थी, इसलिए इस चक्रवात को ‘अरनब’ नाम दिया गया।

कितना ख़तरनाक है चक्रवात ‘अरनब’?
मौसम विज्ञानियों और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार, चक्रवात ‘अरनब’ साधारण चक्रवात नहीं है, बल्कि इसे ‘अति भीषण चक्रवाती तूफान’ की श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब यह है कि यह तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाने की क्षमता रखता है।
यदि हम इसकी गति की बात करें, तो लैंडफ़ॉल के दौरान हवा की औसत गति 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटा रहने का अनुमान है। तूफान के चरम पर होने पर हवा के तेज़ झोंकों की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुँच सकती है। 150 किमी/घंटा की गति से चलने वाली हवाएं इतनी शक्तिशाली होती हैं कि ये कच्चे मकानों, टीन की छतों, पेड़ों, बिजली के खंभों और टेलीकॉम टावरों को आसानी से उखाड़ सकती हैं।
मौसम विभाग की चेतावनियों के अनुसार, आंध्र प्रदेश के बापटला और विशाखापट्टनम के बीच स्थित यानम के निकट इसके टकराने की सर्वाधिक आशंका जताई गई है। इसके प्रभाव से तटीय इलाकों में भारी बारिश हो सकती है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव और समुद्र में ऊंची लहरें उठने का खतरा बना हुआ है। तटीय क्षेत्रों के निवासियों और मछुराहों को अलर्ट रहने की सलाह दी गई है।
कैसे बनता है चक्रवात?
समुद्र की शांत सतह पर अचानक इतना शक्तिशाली तूफान कैसे खड़ा हो जाता है, यह समझना काफी दिलचस्प और वैज्ञानिक प्रक्रिया है। चक्रवात अरनब का निर्माण भी तय वैज्ञानिक चरणों से होकर गुज़रा है:
कम दबाव का क्षेत्र: जब समुद्र का तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक होता है, तो हवा गर्म होकर ऊपर उठती है। इससे समुद्र सतह पर हवा का दबाव कम होता है और ‘कम दबाव का क्षेत्र’ बनता है। चक्रवात अरनब की शुरुआत भी बंगाल की खाड़ी में बने इसी क्षेत्र से हुई थी।
डिप्रेशन: आसपास की ठंडी हवा तेज़ी से इस कम दबाव वाले क्षेत्र को भरने आती है। पृथ्वी के घूर्णन के कारण यह हवा गोल-गोल घूमने लगती है। जब हवा की गति 31 से 49 किमी/घंटा पहुँचती है, तो इसे ‘डिप्रेशन’ कहते हैं।
डीप डिप्रेशन: जब समुद्र से निरंतर नमी मिलती रहती है, तो यह सिस्टम और मजबूत होता है। हवा की गति 50 से 61 किमी/घंटा पहुँचने पर यह ‘डीप डिप्रेशन’ बनता है।
चक्रवाती तूफान: जब घूमती हवाओं की रफ्तार 62 किमी/घंटा पार कर जाती है, तो इसे ‘चक्रवाती तूफान’ घोषित किया जाता है।
अति भीषण चक्रवाती तूफान: जब हवा की गति 118 से 165 किमी/घंटा तक पहुँच जाती है, तब यह ‘अति भीषण चक्रवाती तूफान’ बनता है। चक्रवात अरनब इसी स्थिति में पहुँचकर तट की ओर बढ़ा।
सितंबर में ‘अरनब’ की चर्चा और नामकरण की हकीकत
सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर काफी भ्रम था कि सितंबर महीने में भी ‘अरनब’ नाम की चर्चा क्यों उछाली जा रही थी? तब यह तूफान क्यों नहीं आया और यह नाम उस समय लागू क्यों नहीं हुआ?
इस सवाल का जवाब मौसम विज्ञान के नियमों में छिपा हुआ है। दरअसल, सितंबर में भी बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र और डिप्रेशन बना था। उस समय कई अनधिकृत स्रोतों ने यह अनुमान लगाना शुरू कर दिया था कि यह सिस्टम जल्द ही चक्रवात में बदलकर ‘अरनब’ कहलाएगा।
परंतु, नियमों के अनुसार, जब तक कोई मौसमी तंत्र कम से कम ‘चक्रवाती तूफान’ के स्तर (हवा की गति 62 किमी/घंटा या अधिक) तक नहीं पहुँच जाता, तब तक उसे नाम आवंटित नहीं किया जाता। सितंबर में बना वह सिस्टम समुद्र में ही कमजोर पड़ गया था और चक्रवात नहीं बन सका। इसी कारण सितंबर में ‘अरनब’ नाम का इस्तेमाल नहीं किया गया। अब जब नया सिस्टम अति भीषण चक्रवात में तब्दील हुआ, तब इसे आधिकारिक रूप से ‘अरनब’ नाम दिया गया।
निष्कर्ष:चक्रवात ‘अरनब’ तटीय जनजीवन के लिए एक गंभीर चेतावनी है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अफ़वाहों से बचें, केवल मौसम विभाग (IMD) के निर्देशों का पालन करें और सुरक्षित रहें। |
Written By – Shivangi Pandey
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