hindi Diwas

हिंदी की वैश्विक स्वीकार्यता के बावजूद देश में उपेक्षा क्यों?

– ललित गर्ग – हिंदी दिवस केवल एक औपचारिक आयोजनात्मक अवसर नहीं, बल्कि हमारी भाषाई अस्मिता राष्ट्रीयता और सांस्कृतिक आत्मगौरव का प्रयोजनात्मक प्रतीक है। विश्व की सर्वाधिक बोली जाने वाली तीसरी भाषा के रूप में हिंदी विश्व की उन चुनिंदा भाषाओं में से एक है जिसे करोड़ों लोग अपनी मातृभाषा, संपर्क भाषा और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति…

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