आज यूरोपीय देशों को पीछे छोड़ते हुए सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत के युवा प्रोफेसनल्स विश्व में अपनी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं |
एआई का सदुपयोग कैसे हर क्षेत्र में किया जाये, इस पर फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए, कैसे इस तकनीकी का उपयोग जन जीवन की बेहतरी में किया जाये,इसके लिए समग्र चर्चा करने की भारत द्वारा स्वागत योग्य पहल भारत में हो रही है |
विश्व के 100 देशों के प्रतिनिधि, सरकारों एवं सम्बंधित क्षेत्र के प्रमुखों सहित विद्यार्थी प्रतिनिधियों को एक साथ बैठा कर विस्तृत चिंतन भारत को विश्व में AI के क्षेत्र में प्रधानता प्रदान करने हेतु सार्थक सिद्ध होता दिख रहा है |
विश्व में तेजी से मजबूत एवं समृद्ध अर्थव्यवस्था के रूप में भारत अपना स्थान बना रहा है, ऐसे में एआई का सदुपयोग करते हुए भारत तेज गति से आगे बढ़ता दिख है, आज यूरोपीय देशों को पीछे छोड़ते हुए सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एआई पर पांच दिवसीय वैश्विक विमर्श खड़ा करते हुए भारत के युवा प्रोफेसनल्स विश्व में अपनी अग्रणी भूमिका निभाते दिख रहे हैं I

इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट
नई दिल्ली के भारत मंडपम और सुषमा स्वराज भवन में आयोजित भव्य समापन समारोह और पुरस्कार वितरण समारोह में एआई के माध्यम से अनेकों समाधानों पर बात हुई । आयोजन में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, निवेशकों और शिक्षाविदों को जोड़ने का कार्य भी हुआ |
राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर अनेकों नवाचारों को बढ़ावा देने एवं उन्हें मान्यता और सहयोग प्रदान करने किये गए । भारत 16 से 20 फरवरी तक इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट चल रही है, इसमें 100 से ज्यादा देश सम्मिलित हुए, 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख तथा 60 मंत्री एवं उपमंत्रियों सहित 100 से अधिक सरकारी प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
इसमें अनेक देशों के राष्ट्राध्यक्ष एवं सरकार प्रमुख तथा विभिन्न देशों के मंत्री एवं उपमंत्रियों सहित अनेकों सरकारी प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं । इनमें सीईओ, संस्थापक, शिक्षाविद, शोधकर्ता, सीटीओ और परोपकारी संगठनों सहित 500 से अधिक वैश्विक एआई अग्रणी भी सम्मिलित हैं ।
अतः एआई और इसके प्रभाव पर अनुसंधान संगोष्ठी, शिखर सम्मेलन का इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट एक प्रमुख शैक्षणिक मंच बनता दिख रहा है।
अमेरिका और ब्रिटेन ने क्या कहा ?
नई दिल्ली में चल रही इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट में विश्व के प्रमुख देशों के प्रतिनिधियों द्वारा भारत की प्रतिभा और उद्यमशीलता की अपने-अपने शब्दों में उल्लेख किया है, संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुतरश ने कहा है कि विकासशील देश में आयोजित होने वाले पहले एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए भारत सबसे उपयुक्त स्थल है। श्री गुतरश ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को केवल कुछ शक्तिशाली देशों तक सीमित न रखकर पूरे विश्व की सेवा करनी चाहिए। ब्रिटेन ने कहा है कि नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में ब्रिटेन का मुख्य ध्यान इस बात पर रहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किस प्रकार विकास को गति दे सकती है, कैसे नए रोजगार सृजित किये जा सकते हैं, कैसे सार्वजनिक सेवाओं में सुधार किया जा सकता है एवं विश्वभर के लोगों को लाभ पहुंचा सकती है।
उप प्रधानमंत्री डेविड लैमी और एआई मंत्री कनिष्क नारायण के नेतृत्व में ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल इस बात पर ध्यान देगा कि एआई किस प्रकार विश्व के हर कोने में रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बना सकती है और एआई को नवीनीकरण के एक ऐसे संचालक के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है जो डॉक्टरों को तेजी से निदान करने, शिक्षकों को व्यक्तिगत शिक्षण प्रदान करने, परिषदों को मिनटों में सेवाएं प्रदान करने तथा व्यवसायों को अगली पीढ़ी के अच्छे रोजगार सृजित करने में सहायता कर सकता है।
महाशक्तियों की ही दादागिरी क्यों
यह सम्मलेन कई मायनों में भी सफल होता दिख रहा, जैसे कि AI के क्षेत्र में विश्व की बड़ी महाशक्तियां जैसे अमेरिका और चीन का एकाधिकार ही न माना जाये, AI सम्पूर्ण विश्व और मानवता के कल्याण का कार्य करे, बदलते परिवेश में हम कैसे गतिमान जीवन जीने में इस प्रोद्योगिकी का सदुपयोग करके भारत को अग्रणी देशों, वैश्विक महाशक्तियों की सूची में सम्मिलित कर सकते हैं इसका उदाहरण भी विश्व के समक्ष आया |
एवं यह भी समझ आया कि एआई इंसानों के फायदे के लिए एक सार्वभौमिक साधन बनाने के लिए भारत में प्रयास जारी हैं I ‘भारत आज एक बेहद सफल उभरती हुई अर्थव्यवस्था है और न सिर्फ वैश्विक अर्थव्यवस्था में बल्कि वैश्विक मामलों में अपने प्रभाव में लगातार बढ़ोतरी होती दिख रही है |
दुनिया में बहुध्रुवीयता की आवश्यकता सदैव ही रही है , उभरती अर्थव्यवस्थाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, भारत उनमें से एक प्रमुख देश है, भारत अकें क्षेत्रों प्रगति की रह पर अग्रसर है, निश्चित रूप से विश्व में आज व्यापार, प्रौद्योगिकी और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग संबंधों का एक मजबूत नेटवर्क स्थापित करना आवश्यक है.
आज दुनिया भर में, विकसित देशों के साथ-साथ उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक ऐसा नेटवर्क बनाना होगा, जो किसी एक या चुनिन्दा देशों के वर्चस्व के बिना सच्ची बहुध्रुवीयता का निर्माण कर सकेI इसलिए AI के माध्यम से यह सब संभव करने को आतुर है भारत |


